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Why Do This Business

SAFESHOP ‘‘आपके लिये क्यों जरूरी है‘‘

मित्रों जिन्दगी आपकी है इसे जीना है कि काटना है, तय आपको करना हैं। क्योंकि ‘‘अमीर के घर या गरीब के घर पैदा होना यह आपके हाथ में नहीं है, लेकिन जिन्दगी भर गरीब रहना है या अमीर बनना है, यह सिर्फ आपके हाथ में है।

सपनों की जिन्दगी-समझौता की जिन्दगी से आजादी

वर्तमान में हम में से ज्यादातर लोग बडे़ सपने देखना बन्द कर चुके है, क्योकि इसे पूरा करने बहुत ज्यादा पैसों की आवश्यकता होती है। लेकिन जब हम कुछ लोगों को देखते है जो अमीर है और अपने सपनों की जिन्दगी जी रहे है। तब हमें ऐसा लगता है कि सपनों की ऐसी जिन्दगी जीना हमारे भाग्य में नहीं है। हमारा समाज, वातावरण हमें लगातार समझौते भरी जिन्दगी जीने को मजबूर करता है और हम मान लेते है कि बड़ा घर, अच्छी कार, luxury life style , देश-विदेश की यात्रा, बेहतर चिकित्सा, बैंक बैलेंस, बच्चों की अच्छी शिक्षा, खान-पान यह सब रईसों की जिन्दगी का हिस्सा है यह हमारे बस की बात नहीं जैसे जंगल से महावत हाथी के बच्चे को पकड़कर लाता है और उसे छोटे से जंजीर व खूंटे के बांधकर कई दिनों तक छोड़ देता है। हाथी का बच्चा उस जंजीर को तोड़ने का प्रयास करता है, उसका पैर लहूलूहान हो जाता है। पर महावत उसका ईलाज नहीं कराता है, ताकि वो ंजजीर को दुबारा तोड़ने का प्रयास नहीं करें। वही हाथी का बच्चा जब विशालकाय हाथी बन जाता है और जंगल में बड़ी-बड़ी लकडिया गठ्ठर को उठा लेता है। तब भी वह महावत उस हाथी को उसी छोटे से खूंटे व जंजीर में बांधता है। वह विशालकाय हाथी अब चाहे तो एक झटके में खूंटे और जंजीर को तोड़ कर आजादी की जिन्दगी जी सकता है, पर वह प्रयास नहीं करता क्योंकि उसके मन में यह बात बैठ चुकी है कि मैं इस जंजीर को नही तोड़ सकता। और इस तरह वह हाथी जीवन भर गुलामी की जिन्दगी जीते-जीते एक दिन मर जाता है। हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। बचपन से हमे बार-बार बताया जाता है कि ज्यादा बड़े सपने मत देखों, हवा में मत उड़ो जितनी चादर उतनी पैर फैलाओं, इन कारणों से हम समझौते की जिन्दगी जीने के आदि हो जाते है। किसी बड़े रेस्टोरेंट में जाते है, तब मेनु कार्ड में रेट पहले देखते है, कपड़े खरीदने से पहले रेट क्या है देखते है, कम रेंज की दिखाना कहते है। और तो और लोग इलाज में भी समझौता करते है। मित्रों हम सभी के अन्दर बहुत क्षमताये होती है जिससे हम समझौते भरी जिन्दगी से आजाद होकर अपने समनो की जिन्दगी को जी सकते है। जरूरत है तो सिर्फ एक ऐसे प्लेंटफार्म की जहाॅ हमारी क्षमताओं को निखारा जाये और हमे खुलकर अपना प्रदर्शन करने का अवसर मिले। बधाई हो आपको आपकी जिन्दगी का सबसे सुनहरा अवसर safeshop के रूप में मिल गया है। इसी प्लेटफार्म में हजारों लोगो ने अपनी जिन्दगी खुशहाल की, सफलता की शिखर पर पहुॅचे गये है और अपने सारे सपनों को पूरा करते जा रहे है एक शानदार, खुशहाल जिन्दगी जी रहें हैै

 

विपरीत परिस्थितियों में परिवार की सुरक्षा-safeshop के साथ

परिवार की सुरक्षा के लिये आर्थिक रूप से सक्षम होना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अच्छी जिन्दगी जीने के साथ-साथ,विपरीत परिस्थितियों में भी परिवार के किसी सदस्य के इलाज के लिये बहुत पैसों की आवश्यकता होती है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अपने अपनों के इलाज के लिये, लोगो को अपना जमीन, जायदाद व अन्य सम्पतित तक बेचनी पड़ जाती है। और उससे भी तकलीफ की स्थिति तब हो जाती है, जब परिवार का कमाऊ व्यक्ति गुजर जाता है, उस समय उस परिवार के ऊपर दुःखों का पहाड़ टूट जाता है और उस परिवार को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भी आपके परिवार के लिये safeshop एक बड़ा सहारा बन सकता है। आप यहाॅ काम करके एक अच्छा मुकाम हासिल कर अपने परिवार को सही मायनों में सुरक्षा देते है।

हम यहाॅ एक उदाहरण प्रस्तुत करते है-

स्वर्गीय श्री श्याम सुन्दर जी ने नवम्बर 2003 में safeshop बिजिनेस की शुरूआत की थी। उन्होने पूरी लगन व निष्ठा से मेहनत करते हुये अक्टूबर 2006 में अपना डायमण्डशिप हासिल किया। श्री श्याम सुन्दर जी अपने सपनो को लगातार साकार करते ही जा रहे थे कि अचानक 6 जुलाई 2007 की रात एक सड़क दुर्घटना में उनकी अकस्मात मृत्यु हो गयी। उनकी मृत्यु का समाचार सुनकर उनके परिवार और पूरे safeshop में शोक की लहर दौड़ गयी। मृत्यु के समय उनका नेटवर्क टीम 17000 का था,जो उनकी मृत्यु के बाद टीम के लीडर्स की मेहनत से बढ़कर 50000 से भी ज्यादा का हो चुका है। आज उनकी मृत्यु के पश्चात भी उनके परिवार में कार, बैंक बैलेंस, जमीन जायदाद और सुखसुविधाओं की कोई कमी नहीं है। आज हर महीने उनके परिवार में इतनी इन्कम आती है जो किसी नौकरी या किसी अन्य बिजनेस में लोग शायद पूरे जीवन में भी नहीं कमा पाते, और यह संभव हुआ तो safeshop बिजनेस की बदौलत, हमें विश्वास है कि आज अपने परिवार की प्रगति देखकर उनकी आत्मा को बहुत शांति एवं प्रसन्ना मिलती होगी। हम सभी safeshop के साथी श्री श्याम सुन्दर जी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते है। ऊपर लिखे उदाहरण से आप समझ सकते है कि कैसे आज श्री श्याम सुन्दर जी के जाने के बाद भी उनके परिवार कोटीम वर्क और नेटवर्क की ताकत की वजह से उनकी अगली पीढ़ी को भी आमदनी जा रही है। केवल यही नहीं बल्कि उनके घरमें हर साल बढ़ते हुये क्रम में इन्कम जा रही है।

 

स्वर्गीय हर्ष वस्त्रकार (बिलासपुर, छत्तीसगढ़) जी अपनी जिंदगी में बहुत ही महत्वकांक्षी और आगे बढ़ने की सोच रखते थे. उन्होंने डॉक्टरी की डिग्री ली और उसी दौरान उन्हें सेफ शॉप बिजनेस मिला जहाँ उन्हें यह बात समझ आई की यह एक ऐसा बिजनेस है. जहाँ एक बार काम कर हम भी दुसरे अमीर लोगो की तरह अपना खुद का लोगो का नेटवर्क बना सकते हैं और उसके बाद जिंदगी भर बिना काम के पैसा कमाया जा सकता है. पूरी इम्मंदारी से वो इस बिजनेस में काम करने और अपने सपने पुरे करने में लग गये, परिणाम स्वरुप वे ब्यवसाय शुरू करने के शुरूआती 3 साल में ही 3 बार विदेश (थाईलैंड) यात्रा पर गये और उन्होंने खुद के लिये महिंद्रा जाईलो कार ले लिया.

06-07-2015 को कानपूर शहर में रोड हादसे के दौरान उन्हें काफी चोट आयी और इलाज के दौरान 11-07-2015 को वे हमे छोड़कर चले गये, वो दिन हम सभी के लिये बहुत ही दुखद दिन था लेकिन वे जाते जाते एक लायक और जिम्मेदार बेटे और भाई होने का फर्ज अदा कर गये, जीते जी उन्होंने जो काम किया परिणाम स्वरुप आज हर हप्ते STP और सेफ शॉप बिजनेस से उनके परिवार को महीने के हजारो रूपये कमीसन के रूप में मिलता है.

स्वर्गीय हर्ष वस्त्रकार जी का हमेशा से यह मानना रहा है की…

“काम ऐसा करो की नाम हो जाये, और नाम ऐसा बनाओ की सुनते ही काम हो जाये.

 

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